राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देशभर में चल रही स्लीपर बसों की सुरक्षा स्थिति को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को निर्देश दिया है कि सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाली सभी स्लीपर कोच बसों को तुरंत संचालन से बाहर किया जाए। यह कार्रवाई उन शिकायतों के आधार पर की गई है जिनमें हाल ही में कई बसों में सफर के दौरान अचानक आग लगने की घटनाओं का उल्लेख किया गया था। इन हादसों में कई यात्रियों की जान गई और कई घायल हुए, जबकि शिकायतकर्ता के अनुसार, बेहतर डिजाइन और समय पर चेतावनी की व्यवस्था होती तो इन मौतों को टाला जा सकता था।
शिकायत में कहा गया है कि कई बसों में ड्राइवर का केबिन यात्रियों के हिस्से से पूरी तरह अलग रहता है, जिसके कारण आपात स्थिति में आग का तुरंत पता नहीं चलता और न ही ड्राइवर तक सूचना पहुंच पाती है। इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुरक्षित जीवन के अधिकार का गंभीर उल्लंघन बताया गया है। मामले का संज्ञान लेते हुए आयोग की सदस्य प्रियांक कानूनगो ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (सीआईआरटी) को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। दोनों से कहा गया है कि शिकायत में उठाए गए मुद्दों की जांच कर दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपें।
आयोग के निर्देशों के तहत सीआईआरटी ने 18 अक्टूबर 2025 से तकनीकी जांच शुरू की थी। जांच रिपोर्ट, जो 3 नवंबर 2025 को प्रस्तुत की गई, में बताया गया कि संबंधित बसों की बॉडी बिल्डिंग में गंभीर खामियां पाई गई हैं। ये खामियां केंद्रीय मोटर वाहन नियमों (सीएमवीआर) के तहत निर्धारित सुरक्षा आवश्यकताओं का उल्लंघन करती हैं। सीआईआरटी ने अपने निष्कर्ष राजस्थान परिवहन विभाग को भेज दिए हैं ताकि आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि यात्रियों की सुरक्षा से समझौता किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़क परिवहन व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित और मानकों के अनुरूप हो।









