फ्रांस के खूबसूरत शहर कान्स में 79वें कान्स फिल्म फेस्टिवल का आगाज हो चुका है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में शामिल इस इवेंट में इस बार भारत की रीजनल और इंडिपेंडेंट फिल्मों की मजबूत मौजूदगी देखने को मिल रही है। इस साल रेड कार्पेट की चमक के साथ-साथ भारतीय सिनेमा की विविधता भी सुर्खियां बटोर रही है। पंजाबी, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी सिनेमा की कई चुनिंदा फिल्में अपने दमदार कंटेंट और सामाजिक संदेशों के साथ वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।
- फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) की छात्रा मेहर मल्होत्रा द्वारा निर्देशित शॉर्ट फिल्म “Shadows of the Moonless Nights” को ‘ला सिनेफ’ सेक्शन में जगह मिली है। यह फिल्म एक फैक्ट्री वर्कर की थकान और शहरी जीवन की भागदौड़ में छिपे मानवीय संघर्ष को दर्शाती है।
- मलयालम सिनेमा की क्लासिक फिल्म “Amma Ariyan” को फिल्म हेरिटेज फाउंडेशन द्वारा 4K में रिस्टोर कर ‘कान्स क्लासिक्स 2026’ में शामिल किया गया है। यह फिल्म केरल के राजनीतिक माहौल और एक मां को बेटे की मौत की खबर देने की भावनात्मक यात्रा को दिखाती है।
- पंजाबी सिनेमा से एमी विर्क की फिल्म “Chardikala” भी कान्स में प्रदर्शित की जा रही है। इस फिल्म में एक नर्स की संघर्षपूर्ण कहानी को दिखाया गया है, जो झूठे आरोपों के बावजूद दूसरों की मदद करती रहती है।
- निर्देशक चिदंबरम की नई फिल्म “Balan: The Boy” ‘मार्शे डू फिल्म’ सेक्शन में पेश की गई है। यह फिल्म एक किशोर के मानसिक संघर्ष और अपनी पहचान की खोज की कहानी पर आधारित है।
- हिंदी-कन्नड़ फिल्म “September 21” भी इस साल कान्स में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। यह फिल्म अल्जाइमर और केयरगिवर्स के संघर्ष को संवेदनशील तरीके से पेश करती है, जिसमें खामोशी को एक भावनात्मक भाषा के रूप में इस्तेमाल किया गया है।
- इसके अलावा डॉक्यूमेंट्री “Spirit of the Wildflower” भी ‘मार्शे डू फिल्म’ में प्रदर्शित हो रही है, जो मध्य प्रदेश में महुआ डिस्टिलरी चलाने वाली दो बहनों की प्रेरक कहानी को दिखाती है।
इस वर्ष कान्स में भारत की रीजनल फिल्मों का दबदबा देखने को मिल रहा है, जहां इंडिया पवेलियन का थीम “Stories Without Borders” रखा गया है। इस मौके पर फिल्मकार आशुतोष गोवारिकर जैसे दिग्गज भी भारतीय सिनेमा के भविष्य पर चर्चा के लिए मौजूद हैं।








