पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 सांसदों के एक समूह ने पार्टी से अलग होकर नई राजनीतिक दिशा अपनाने का दावा किया। रिपोर्टों के अनुसार, इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर अपनी नई स्थिति की जानकारी दी और अलग बैठने की व्यवस्था का अनुरोध किया।
इन सांसदों ने कथित रूप से ‘नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी’ (एनसीपीआई) नामक एक क्षेत्रीय राजनीतिक दल में विलय का ऐलान किया है। बताया जा रहा है कि यह पार्टी त्रिपुरा आधारित एक छोटा क्षेत्रीय दल है, जिसका मुख्य समर्थन बंगाली भाषी समुदाय में माना जाता है। हालांकि इसका राष्ट्रीय स्तर पर अभी कोई बड़ा राजनीतिक ढांचा या संसदीय प्रतिनिधित्व नहीं है, लेकिन सांसदों के जुड़ने के दावे के बाद यह चर्चा में आ गई है। समूह की ओर से यह भी कहा गया कि यह निर्णय संगठनात्मक असंतोष और नेतृत्व शैली को लेकर उठी नाराजगी के बाद लिया गया है। सांसदों ने दावा किया कि वे आगे चलकर केंद्र की एनडीए सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे और प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय विकास के एजेंडे को समर्थन देंगे।
इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने इसे टीएमसी के भीतर आंतरिक संकट का संकेत बताया है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से इसे राजनीतिक पुनर्संयोजन के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अभी इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक पुष्टि और आगे की संसदीय प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि यह दावा औपचारिक रूप से मान्य होता है, तो इससे पश्चिम बंगाल की राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।









