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पति के दबाव में पैतृक संपत्ति मांगना भी दहेज की मांग, कलकत्ता हाईकोर्ट का अहम फैसला

कलकत्ता हाईकोर्ट ने दहेज हत्या से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला को उसके पति या ससुराल पक्ष के दबाव में मायके से पैतृक संपत्ति में हिस्सा या धन लाने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इसे दहेज की मांग माना जाएगा। अदालत ने कहा कि महिला को अपनी पैतृक संपत्ति में हिस्सा मांगने का कानूनी अधिकार है, लेकिन यदि यह मांग पति के उत्पीड़न या दबाव का परिणाम है, तो यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304बी के दायरे में आएगी।

यह मामला वर्ष 2014 का है, जब विवाह के चार साल बाद एक महिला ने अपनी नाबालिग बेटी की हत्या करने के बाद आत्महत्या कर ली थी। ट्रायल कोर्ट ने पति और उसके माता-पिता को दहेज हत्या और क्रूरता का दोषी ठहराया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद पाया कि सास-ससुर के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं, इसलिए उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान पति ने दलील दी कि उसकी पत्नी केवल अपने पैतृक संपत्ति में कानूनी हिस्से की मांग कर रही थी, इसलिए इसे दहेज नहीं कहा जा सकता। लेकिन अदालत ने पाया कि महिला के भाई ने पहले ही संपत्ति का एक हिस्सा बेचकर उसे रकम दी थी। इसके बावजूद पति लगातार उस पर शेष संपत्ति बिकवाकर पैसा लाने का दबाव बना रहा था। अदालत ने माना कि यही मानसिक उत्पीड़न महिला की आत्महत्या का प्रमुख कारण बना।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी से मामले की विश्वसनीयता कम नहीं होती, क्योंकि ऐसे दुखद मामलों में परिवार को सामान्य स्थिति में आने और कानूनी सलाह लेने में समय लगना स्वाभाविक है। अदालत ने पति की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए आजीवन कारावास की सजा को घटाकर 10 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया और कहा कि आजीवन कारावास केवल अत्यंत दुर्लभ मामलों में ही दिया जाना चाहिए।