हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों का बिगुल बज गया है। करीब तीन महीने की देरी के बाद राज्य चुनाव आयुक्त अनिल खाची ने शिमला में प्रेस वार्ता कर चुनाव कार्यक्रम की घोषणा की। इसके साथ ही पूरे प्रदेश में आचार संहिता लागू हो गई है, जो अगले एक महीने तक प्रभावी रहेगी। चुनाव तीन चरणों में आयोजित किए जाएंगे। पहला चरण 26 मई, दूसरा 28 मई और तीसरा चरण 30 मई को होगा। चुनाव की अधिसूचना 29 अप्रैल को जारी की जाएगी, जबकि नामांकन प्रक्रिया 7, 8 और 11 मई तक चलेगी। 12 मई को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 14-15 मई तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे।
प्रदेश में करीब 50 लाख 48 हजार मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें लगभग 51 हजार नए मतदाता पहली बार वोट डालेंगे। चुनाव के लिए 21 हजार से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे और जरूरत पड़ने पर सहायक मतदान केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। काजा के लांग्जा स्थित कौमिक स्कूल में प्रदेश का सबसे ऊंचाई वाला मतदान केंद्र स्थापित किया गया है। मतदान बैलेट पेपर के जरिए होगा और मतदाता 17 प्रकार के पहचान पत्रों का उपयोग कर सकेंगे। मतदान के बाद पंचायत मुख्यालय स्तर पर प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों की मतगणना होगी, जबकि जिला परिषद के लिए ब्लॉक स्तर पर गिनती की जाएगी। पंचायत समिति की मतगणना 31 मई को होगी।
इस चुनाव में कुल 3754 प्रधान, 3754 उपप्रधान, 21,654 ग्राम पंचायत सदस्य, 1769 पंचायत समिति सदस्य और 251 जिला परिषद सदस्य पदों के लिए मतदान होगा। इनमें लगभग 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। जिला परिषद चुनाव के लिए खर्च सीमा एक लाख रुपये निर्धारित की गई है। राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि आरक्षण रोस्टर तय करना सरकार का कार्य है और आयोग इसकी प्रक्रिया में शामिल नहीं होता। साथ ही आचार संहिता के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इन पंचायत चुनावों पर लगभग 40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और पूरे प्रदेश में शांतिपूर्ण व निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।









