Uttar Pradesh

“सहमति से बने संबंध को रेप नहीं माना जा सकता”: इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, आरोपी को मिली अग्रिम जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि वयस्कों के बीच लंबे समय तक सहमति से बने शारीरिक संबंधों को बलात्कार की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी रेप के एक मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की। यह मामला आजमगढ़ के सिधारी थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी।

सुनवाई के दौरान जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला की सिंगल बेंच ने पाया कि एफआईआर और पीड़िता के बयान में कई विरोधाभास हैं। कोर्ट के अनुसार, पीड़िता के धारा 183 के तहत दर्ज बयान में दोनों के बीच सहमति से संबंध होने की बात सामने आती है, जबकि एफआईआर की कहानी इससे अलग है। कोर्ट ने यह भी देखा कि पीड़िता ने स्वीकार किया कि 2022 से वह आरोपी के संपर्क में थी और उनके बीच संबंध बने थे। इसके अलावा मेडिकल बयान में भी लंबे समय से संबंधों की बात सामने आई।

हालांकि राज्य सरकार ने याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी ने दबाव और हथियार के बल पर संबंध बनाए, लेकिन कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद तथ्य इस कहानी से मेल नहीं खाते। सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया मामला संदेह पैदा करता है और आरोपी का कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। इसके आधार पर अदालत ने आरोपी को सशर्त अग्रिम जमानत दे दी और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया।