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पंजाब निकाय चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, 50 वार्डों में दोबारा मतदान के आदेश

पंजाब के नगर निगम चुनावों में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पटियाला और मोगा के 50 वार्डों में हुए चुनाव रद्द कर दिए हैं। अदालत ने इन सभी वार्डों में छह सप्ताह के भीतर नए सिरे से चुनाव कराने का निर्देश दिया है। साथ ही पूरी चुनाव प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र समिति गठित करने को कहा गया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने 28 सितंबर को यह आदेश सुनाया। मामले की सुनवाई के दौरान उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने, नामांकन पत्र छीनने या नष्ट करने, मारपीट और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। कुछ जगहों पर नामांकन प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी नहीं कराई गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति निर्मलजीत कौर को इन आरोपों की जांच सौंपी थी। उनकी रिपोर्ट में कई स्थानों पर चुनाव प्रक्रिया में बाधा डालने की घटनाओं की पुष्टि हुई। पटियाला के 28 वार्डों में विपक्षी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने से जुड़ी अनियमितताएं सामने आईं। वहीं, मोगा जिले के धर्मकोट के सात और बाघापुराना के सभी 15 वार्डों में भी चुनाव प्रक्रिया प्रभावित पाई गई।

अदालत ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक सप्ताह के भीतर निगरानी समिति गठित करने का निर्देश दिया है। इसमें सेवानिवृत्त हाई कोर्ट न्यायाधीश के अलावा दो या तीन वरिष्ठ अधिवक्ताओं को चुनाव सुपरवाइजर बनाया जाएगा। नए चुनाव में नामांकन से लेकर मतदान तक पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। चुनाव परिणाम तभी घोषित किए जाएंगे, जब हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश निगरानी समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रक्रिया की निष्पक्षता से संतुष्ट होंगे।