Haryana Punjab

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: 20% से कम दिव्यांगता पर भी सैनिकों को मिलेगा पेंशन लाभ

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि भारतीय सेना का कोई भी जवान यदि सेवा के दौरान दिव्यांग होता है, तो केवल 20 प्रतिशत से कम दिव्यांगता के आधार पर उसे दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने केंद्र सरकार की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि न्यूनतम 20 प्रतिशत दिव्यांगता की शर्त पूरी न होने पर पेंशन का लाभ नहीं दिया जाएगा।

यह फैसला जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने सुनाया। पीठ केंद्र सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एक सैनिक को मेडिकल आधार पर सेवा से मुक्त किए जाने के बाद दिव्यांगता पेंशन देने के आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) के 2019 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी जवान को सेवा के दौरान हुई या बढ़ी हुई दिव्यांगता के कारण सेवा से बाहर किया गया है, तो उसे पेंशन लाभ से वंचित करना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि सरकार यह साबित करने में असफल रही कि संबंधित सैनिक दिव्यांगता के बावजूद सेवा में बने रह सकते थे।

पीठ ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार और सेना के उच्च अधिकारियों के बीच आंतरिक पत्राचार या प्रशासनिक निर्देश सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानून से ऊपर नहीं हो सकते। अदालत ने केंद्र की याचिका को खारिज करते हुए AFT के आदेश को बरकरार रखा। इस निर्णय को पूर्व सैनिकों के अधिकारों की रक्षा और उनके हितों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है, जो भविष्य में ऐसे मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।