भारतीय वायुसेना ने ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के तहत 7 मई 2025 को पाकिस्तान के मुरिदके स्थित लश्कर-ए-तैयबा के मुख्य ठिकाने मरकज़ तैयबा को तबाह कर दिया था. रात 12:35 बजे हुए इस सटीक एयरस्ट्राइक में लाल और पीली रंग की तीन अहम इमारतें पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गई थीं. इनमें आतंकी ट्रेनिंग सेंटर, हथियार भंडार और शीर्ष कमांडरों का आवास शामिल था.
लेकिन अब, महज़ कुछ महीनों बाद, पाकिस्तान की छत्रछाया में यह आतंकी अड्डा एक बार फिर खड़ा किया जा रहा है. 18 अगस्त से पुनर्निर्माण की शुरुआत हुई और 7 सितंबर तक मलबा हटाकर नए ढांचे की नींव डाल दी गई. रिपोर्ट्स के अनुसार, 5 फरवरी 2026 (कश्मीर एकजुटता दिवस) तक मरकज़ तैयबा का नया परिसर तैयार हो सकता है.
इस परियोजना की निगरानी लश्कर के वरिष्ठ आतंकी मौलाना अबू जर और यूनुस शाह बुखारी कर रहे हैं. निर्माण में तेजी लाने के लिए लश्कर ने “बाढ़ राहत” के नाम पर फंडिंग की रणनीति अपनाई है. राहत शिविरों के ज़रिए जुटाई गई करोड़ों की रकम का असली इस्तेमाल आतंकी ठिकानों के निर्माण में हो रहा है जैसा कि उन्होंने 2005 में भूकंप के दौरान किया था. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार और सेना से भी खुला समर्थन मिला है. शुरुआती 4 करोड़ पाकिस्तानी रुपये दिए गए, जबकि पूरा खर्च 15 करोड़ से अधिक हो सकता है.









