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कूटनीति किसी को खुश करने का खेल नहीं, जयशंकर का अमेरिका को सख्त संदेश—भारत-रूस रिश्ते 70 साल से मज़बूत

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि भारत की विदेश नीति किसी को खुश करने पर नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रीय हितों पर आधारित है। हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में बोलते हुए उन्होंने रूस, अमेरिका, पाकिस्तान और चीन पर भारत की रणनीतिक सोच रखी।

जयशंकर के मुताबिक रूस और भारत के संबंध पिछले कई दशकों में बेहद मजबूत और भरोसेमंद रहे हैं। दुनिया की राजनीति में चाहे जितने बदलाव आए हों, दोनों देशों की दोस्ती स्थिर बनी रही है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया यात्रा का मकसद इस रिश्ते को नए आर्थिक आयाम देना था। भारत और रूस अब कृषि व उर्वरक क्षेत्र में नए संयुक्त प्रयास कर रहे हैं, जो भारतीय किसानों के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे, क्योंकि भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा फर्टिलाइज़र आयातक है।

अमेरिका के साथ चल रही व्यापार वार्ताओं पर उन्होंने दोहराया कि भारत किसी भी तरह के दबाव में फैसले नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन में मौजूदा प्रशासन का ध्यान व्यापार पर है, लेकिन भारत अपने मजदूरों, किसानों और छोटे व्यापारियों के हितों से समझौता नहीं करेगा। अमेरिकी टैरिफ पर उन्होंने कहा कि बातचीत कठिन होगी, लेकिन समाधान तभी स्वीकार्य होगा जब शर्तें भारत के लिए न्यायसंगत हों।

पड़ोसी देशों पर बात करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान से जुड़ी समस्याओं की जड़ उसकी सेना है, जहां से आतंकवाद और भारत-विरोधी सोच जन्म लेती है। चीन पर उन्होंने दोहराया कि सीमा पर स्थिरता दो देशों के रिश्तों के सामान्य होने की अनिवार्य शर्त है। जब तक सीमा विवाद से जुड़े मुद्दे हल नहीं होते, रिश्तों में सामान्य स्थिति बहाल नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी कहा कि भारत बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करता है। जयशंकर ने अपने बयान में स्पष्ट कर दिया कि भारत की कूटनीति आज आत्मविश्वासी, स्वायत्त और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है—और यही उसकी ताकत है।