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GST 2.0: रजिस्ट्रेशन से रिफंड तक आसान होंगे नियम, कारोबारियों को मिलेंगे कई फायदे

वस्तु एवं सेवा कर (GST) परिषद की 57वीं बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए कई अहम फैसले लिए गए। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक का मुख्य उद्देश्य टैक्स दरों में बदलाव करने के बजाय जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना रहा। सबसे बड़ा बदलाव जीएसटी रजिस्ट्रेशन और रिफंड प्रक्रिया में किया गया है। कम जोखिम वाले कारोबारियों को अब सिस्टम के जरिए तीन दिन में रजिस्ट्रेशन मिल सकेगा। नाम, पता या डायरेक्टर से जुड़े सामान्य बदलाव भी ऑटोमैटिक तरीके से मंजूर किए जाएंगे।

रिटर्न में छोटी-मोटी गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया भी आसान होगी। बिल में संशोधन होने पर उसका लाभ संबंधित खरीदार को सिस्टम के जरिए मिल सकेगा। वहीं, रिफंड क्लेम की प्रक्रिया को तेज करते हुए 90 फीसदी मामलों में सिस्टम तीन दिन के भीतर रिफंड जारी कर सकेगा। छोटे मामलों में अनावश्यक नोटिस और कार्रवाई को कम करने का भी फैसला हुआ है। 10,000 रुपये से कम के मामलों में नोटिस नहीं भेजा जाएगा। साथ ही सामान्य जुर्माने की सीमा 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये करने और प्रॉसिक्यूशन की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा गया है।

इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े नियमों में भी कई बदलाव किए गए हैं। ईमानदार खरीदारों के हितों की सुरक्षा, कुछ बीमा और अन्य कारोबारी खर्चों पर ITC तथा कुछ सेवाओं पर दोहरे टैक्स को रोकने जैसे प्रावधान शामिल हैं। छोटे कारोबारियों के लिए रिटर्न और बिजनेस बंद करने की प्रक्रिया भी सरल होगी। ई-कॉमर्स के जरिए दूसरे राज्यों में कारोबार करने वाले छोटे विक्रेताओं के लिए भी नियम आसान किए गए हैं। खास बात यह है कि 57वीं बैठक में किसी वस्तु या सेवा की GST दर में बदलाव नहीं किया गया। फिलहाल परिषद का जोर टैक्स व्यवस्था को अधिक डिजिटल, पारदर्शी और सरल बनाने पर है।