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EPFO ने बदले निजी PF ट्रस्टों के नियम, ब्याज दर पर 2% की सीमा तय

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने निजी पीएफ ट्रस्ट संचालित करने वाली कंपनियों के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी कर ली है। इन बदलावों का उद्देश्य कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को अधिक सुरक्षित बनाना और निजी ट्रस्टों में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है। नए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) के तहत अब छूट प्राप्त पीएफ ट्रस्ट EPFO द्वारा घोषित वार्षिक ब्याज दर से अधिकतम 2 प्रतिशत ज्यादा ब्याज ही दे सकेंगे।

सरकार के अनुसार, कुछ छोटे निजी ट्रस्ट कम सदस्यों के आधार पर 30 प्रतिशत से अधिक ब्याज दरों की घोषणा कर रहे थे, जिससे वित्तीय जोखिम बढ़ने की आशंका थी। इसी स्थिति को नियंत्रित करने और कर्मचारियों की जमा राशि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ब्याज दरों पर यह सीमा तय की गई है। नियमों में दूसरा बड़ा बदलाव ऑडिट प्रक्रिया से जुड़ा है। अब सभी कंपनियों का हर साल अनिवार्य ऑडिट नहीं किया जाएगा। EPFO ने पारंपरिक ऑडिट सिस्टम की जगह रिस्क-आधारित ऑडिट मॉडल लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत केवल उन्हीं संस्थानों की जांच होगी, जहां नियमों के उल्लंघन या वित्तीय गड़बड़ी की आशंका होगी। इससे नियमों का पालन करने वाली कंपनियों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव कम होगा।

देशभर में लगभग 1,000 से 1,200 बड़ी कंपनियां, सार्वजनिक उपक्रम और निजी संस्थान EPFO से छूट प्राप्त कर अपने अलग पीएफ ट्रस्ट चलाते हैं। हालांकि, उन्हें कर्मचारियों को EPFO के बराबर या उससे बेहतर सुविधाएं देना अनिवार्य होता है। नए नियमों में मर्जर और एक्विजिशन के बाद भी कंपनियों को अपना छूट प्राप्त दर्जा बनाए रखने की अनुमति दी गई है। साथ ही, यदि कोई कंपनी स्वेच्छा से या अदालत के आदेश पर यह दर्जा छोड़ती है, तो उसे सार्वजनिक सूचना जारी करनी होगी ताकि कर्मचारियों की जमा राशि सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर की जा सके। माना जा रहा है कि इन बदलावों से निजी पीएफ ट्रस्टों में पारदर्शिता और कर्मचारियों का भरोसा दोनों मजबूत होंगे।