अप्रैल महीने में देश का वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन एक नया रिकॉर्ड बनाते हुए करीब ₹2.42 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 8.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाता है। इससे पहले अप्रैल 2025 में सबसे अधिक GST कलेक्शन ₹2.23 लाख करोड़ दर्ज किया गया था, लेकिन इस बार यह आंकड़ा उससे भी आगे निकल गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सकल GST कलेक्शन के साथ-साथ शुद्ध (नेट) GST राजस्व में भी वृद्धि देखने को मिली है। अप्रैल में नेट GST कलेक्शन लगभग ₹2.11 लाख करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 7.3 प्रतिशत अधिक है। यह संकेत देता है कि कर संग्रह व्यवस्था और आर्थिक गतिविधियों में लगातार सुधार हो रहा है।
वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत भी मजबूत रही है। इस अवधि में कुल GST संग्रह 8.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹22.27 लाख करोड़ तक पहुंच गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा ₹20.55 लाख करोड़ था। वहीं, नेट GST राजस्व भी बढ़कर ₹19.34 लाख करोड़ हो गया, जो 7.1 प्रतिशत की सालाना वृद्धि को दर्शाता है। राज्यों के योगदान की बात करें तो GST संग्रह में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा, इसके बाद कर्नाटक, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश का स्थान रहा। इन राज्यों ने देश के कुल कर संग्रह में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद यह वृद्धि भारत की मजबूत घरेलू मांग और व्यापारिक गतिविधियों का संकेत है। खासकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय तनाव के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन स्थिर बना हुआ है। कुल मिलाकर, अप्रैल का GST कलेक्शन यह दिखाता है कि देश की आर्थिक गतिविधियां गति पकड़ रही हैं और कर संग्रह प्रणाली अधिक प्रभावी होती जा रही है।









