राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल 20 जनवरी को अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा रणनीति के सबसे मजबूत स्तंभ माने जाने वाले डोभाल को उनके साहसिक खुफिया अभियानों के कारण ‘भारत का जेम्स बॉन्ड’ कहा जाता है। 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे अजीत डोभाल सेना अधिकारी के पुत्र हैं। 1969 बैच के केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी डोभाल 1972 में इंटेलिजेंस ब्यूरो से जुड़े। उन्होंने पाकिस्तान के लाहौर स्थित भारतीय दूतावास में छह साल तक सेवाएं दीं, जहां उन्होंने अंडरकवर एजेंट के तौर पर बेहद जोखिम भरे मिशनों को अंजाम दिया।
पाकिस्तान में खुफिया सूचनाएं जुटाने के लिए डोभाल ने मुस्लिम पहचान के साथ लाहौर की गलियों में समय बिताया। उनकी इन्हीं असाधारण क्षमताओं के चलते उन्हें ‘भारत का जेम्स बॉन्ड’ कहा जाने लगा। अजीत डोभाल देश के इकलौते पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। माना जाता है कि 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की बालाकोट एयर स्ट्राइक की रणनीति में उनकी अहम भूमिका रही। इसके अलावा 1989 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से आतंकियों को खदेड़ने के लिए चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक थंडर का नेतृत्व भी उन्होंने किया था। दशकों से देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में जुटे अजीत डोभाल आज भी भारत की रणनीतिक नीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं।









