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तमिलनाडु में फ्रीबीज की राजनीति पर बहस, मुख्यमंत्री विजय के वादों पर उठे आर्थिक सवाल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने के बाद Joseph Vijay ने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा कर अपने चुनावी वादों की शुरुआत कर दी है। इस फैसले को जहां सरकार अपनी शुरुआती सफलता के तौर पर देख रही है, वहीं विपक्ष और विशेषज्ञों ने इसे राज्य की अर्थव्यवस्था पर संभावित बोझ बताया है। विजय ने चुनाव के दौरान महिलाओं को 2500 रुपये मासिक सहायता, गरीब परिवारों के लिए घर, बेरोजगार युवाओं को भत्ता, मुफ्त गैस सिलेंडर, सोने के सिक्के और भविष्य में बाइक व कार जैसी योजनाओं का वादा किया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि इन योजनाओं के लिए आवश्यक भारी वित्तीय संसाधन कहां से जुटाए जाएंगे।

राज्य में पहले से ही बिजली सब्सिडी और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर बड़ा खर्च होता है। 200 यूनिट मुफ्त बिजली लागू होने के बाद बिजली विभाग पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे हजारों करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार राज्य खजाने पर पड़ सकता है। सरकार के भीतर चर्चा है कि योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाए और केवल पात्र लाभार्थियों तक ही सीमित रखा जाए। साथ ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और औद्योगिक विकास के जरिए राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर भी विचार हो रहा है। विपक्ष का कहना है कि इतनी बड़ी घोषणाएं राज्य की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं, जबकि सरकार का तर्क है कि ये योजनाएं गरीब और मध्यम वर्ग को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए जरूरी हैं। अब देखना होगा कि क्या विजय सरकार अपने बड़े वादों को संतुलित आर्थिक मॉडल के साथ पूरा कर पाती है या यह महत्वाकांक्षी योजनाएं वित्तीय चुनौती बनकर रह जाती हैं।