सरकार की ओर से चीनी के आयात की अनुमति देने, स्टॉक सीमा लागू करने और जमाखोरी के खिलाफ कार्रवाई के बाद खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में मामूली राहत देखने को मिली है। उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 28 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 64.33 रुपये प्रति किलोग्राम रही, जबकि 26 अगस्त को यह 65.05 रुपये प्रति किलोग्राम थी। हालांकि, सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की मंजूरी दिए जाने के बाद मिल स्तर पर कीमतों में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन खुदरा कीमतें अभी भी ऊंची बनी हुई हैं। मौजूदा औसत कीमत एक महीने पहले की तुलना में करीब 31 प्रतिशत और पिछले साल के मुकाबले लगभग 39 प्रतिशत अधिक है। गुरुवार को चीनी की अधिकतम खुदरा कीमत 76 रुपये प्रति किलोग्राम और सबसे सामान्य कीमत 65 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई।
भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा विनिर्माता संघ (ISMA) के मुताबिक, हाल के उच्चतम स्तर से चीनी की कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की कमी आई है। संगठन का मानना है कि आपूर्ति बढ़ने और बाजार की स्थिति बेहतर होने से आने वाले दिनों में कीमतों में और नरमी आ सकती है। त्योहारी मांग सामान्य होने और नई चीनी की उपलब्धता बढ़ने से भी बाजार को राहत मिलने की उम्मीद है। कीमतों पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। इसके अलावा डीलरों और पेय पदार्थ कंपनियों जैसे थोक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमा तय की गई है। सरकार ने कुछ महीने पहले चीनी के निर्यात पर भी रोक लगाई थी। ISMA के अनुमान के अनुसार, 2025-26 विपणन वर्ष में एथनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को अलग करने के बाद शुद्ध उत्पादन करीब 279 लाख टन रह सकता है। वहीं घरेलू मांग 280-285 लाख टन रहने का अनुमान है। खराब मौसम और कीटों के कारण गन्ने की फसल प्रभावित होने से उत्पादन अनुमान भी घटाया गया है।


