भारत अपनी सैन्य क्षमता को लगातार मजबूत कर रहा है। इसी कड़ी में भारत और अमेरिका के बीच जेवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम की खरीद को लेकर अहम डील हुई है। जानकारी के मुताबिक भारतीय सेना ने इस सौदे के लिए औपचारिक प्रस्ताव और स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। करीब 300 करोड़ रुपये की यह खरीद आपातकालीन जरूरत के तहत की जा रही है। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी इस डील की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके मुताबिक जेवलिन की खरीद से भारत-अमेरिका के बीच भविष्य में संयुक्त रक्षा उत्पादन की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
जेवलिन को दुनिया की प्रमुख पोर्टेबल एंटी-टैंक मिसाइल प्रणालियों में गिना जाता है। इसे लॉकहीड मार्टिन और RTX ने मिलकर विकसित किया है। यह सिस्टम विशेष रूप से बख्तरबंद वाहनों और टैंकों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और अमेरिकी सेना समेत कई सहयोगी देशों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है। इस मिसाइल सिस्टम की खासियत इसका फायर-एंड-फॉरगेट फीचर है। लक्ष्य को लॉक करने के बाद मिसाइल अपने गाइडेंस सिस्टम के जरिए खुद टारगेट की ओर बढ़ती है। इससे ऑपरेटर को मिसाइल दागने के बाद तुरंत अपनी स्थिति बदलने और संभावित जवाबी कार्रवाई से बचने का मौका मिलता है।
जेवलिन टॉप-अटैक क्षमता के लिए भी जानी जाती है। इसमें मिसाइल लक्ष्य के ऊपर से हमला करती है, जहां टैंक का कवच अपेक्षाकृत कमजोर हो सकता है। इसका सॉफ्ट-लॉन्च सिस्टम इसे सीमित जगहों से भी दागने की सुविधा देता है। भारत के लिए यह सौदा खास तौर पर ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब सेना अपनी एंटी-आर्मर क्षमताओं को आधुनिक बनाने और आपात परिस्थितियों के लिए तैयारियों को मजबूत करने पर जोर दे रही है।


