गुरुवार का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए काफी अस्थिरता भरा रहा। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के चलते भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट पर पहुंच गया। कारोबार के दौरान रुपया 95.34 प्रति डॉलर के अब तक के सबसे निचले स्तर तक गिर गया, हालांकि बाद में इसमें थोड़ा सुधार देखने को मिला। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.01 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही दबाव में आकर 95.34 तक फिसल गया। दोपहर तक यह 95.25 के आसपास ट्रेड कर रहा था। इससे पहले बुधवार को भी रुपया 94.88 प्रति डॉलर पर बंद होकर अब तक के सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच चुका था।
डॉलर इंडेक्स में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसका असर रुपये को संभालने में नाकाफी रहा। वहीं घरेलू शेयर बाजार भी दबाव में रहे। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में भारी गिरावट देखी गई, जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली और तेज हो गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3% से अधिक बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश की चिंताएं बढ़ गई हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा भारी मात्रा में शेयरों की बिक्री ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की कमजोरी और तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। इससे आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं और परिवहन लागत बढ़ने के कारण आम जनता की जेब पर बोझ और बढ़ सकता है। वैश्विक हालात स्थिर न होने तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है।









