National

केन्या में भारत बना पेट्रोलियम उत्पादों का सबसे बड़ा सप्लायर, निर्यात में तेज उछाल

पश्चिम एशिया में होर्मुज संकट और खाड़ी देशों की रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव के बीच भारत के लिए पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात के नए अवसर खुल रहे हैं। खाड़ी क्षेत्र में उत्पादन और पारंपरिक सप्लाई रूट प्रभावित होने के कारण कई देशों ने भारत से पेट्रोल और डीजल की खरीद बढ़ाई है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच भारत का पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात करीब 39.43 प्रतिशत बढ़कर 35.31 अरब डॉलर पहुंच गया। अकेले अगस्त में निर्यात 63.27 प्रतिशत बढ़कर 6.81 अरब डॉलर रहा। केन्या में भारत ने यूएई और सऊदी अरब को पीछे छोड़ते हुए पेट्रोलियम उत्पादों के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता का स्थान हासिल किया है। पूर्वी अफ्रीका के अन्य देशों में भी भारतीय रिफाइंड ईंधन की मांग बढ़ रही है।

तुर्किये भी भारतीय पेट्रोलियम उत्पादों के नए खरीदारों में शामिल हो गया है। रूस से जुड़ी एक रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में वहां आयात किए गए तेल उत्पादों का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा भारत से आया था, हालांकि भारत सरकार ने इस रिपोर्ट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

भारत की मजबूत रिफाइनिंग क्षमता निर्यात बढ़ने का प्रमुख आधार है। देश में 23 चालू रिफाइनरियों की कुल स्थापित क्षमता करीब 26.7 करोड़ टन सालाना है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक इसे 30-31 करोड़ टन और आगे चलकर 45 करोड़ टन तक बढ़ाना है। इससे वैश्विक रिफाइंड ईंधन बाजार में भारत की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।