Assam Politics

असम चुनाव 2026: हिमंत बिस्वा सरमा की रणनीति से विपक्ष का ‘3G कार्ड’ ध्वस्त, भाजपा को बड़ी बढ़त

असम विधानसभा चुनाव 2026 के रुझानों ने राज्य की राजनीति की स्पष्ट तस्वीर पेश कर दी है, जिसमें मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में भाजपा मजबूत बढ़त बनाती दिख रही है। शुरुआती संकेतों के अनुसार भाजपा और उसके सहयोगी गठबंधन को 98 सीटों तक बढ़त मिलती नजर आ रही है, खासकर ऊपरी असम में पार्टी का प्रदर्शन बेहद मजबूत रहा है। कांग्रेस-नीत विपक्षी गठबंधन ने इस चुनाव में ‘अहोम कार्ड’ और ‘गोगोई तिकड़ी (3G)’ की रणनीति के जरिए ऊपरी असम में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की थी। इस रणनीति के तहत गौरव गोगोई, अखिल गोगोई और लुरिनज्योति गोगोई जैसे नेताओं को आगे रखकर अहोम समुदाय का समर्थन जुटाने का प्रयास किया गया। हालांकि, यह रणनीति मतदाताओं के बीच अपेक्षित असर नहीं दिखा सकी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस चुनाव में विकास कार्यों और सामाजिक संदेशों पर आधारित दोहरी रणनीति अपनाई। एक ओर उन्होंने खुद को ‘मामा’ के रूप में एक सहज और जनसंपर्क वाला नेता प्रस्तुत किया, वहीं दूसरी ओर अवैध घुसपैठ और ‘मिया मुस्लिम’ जैसे संवेदनशील मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाकर राजनीतिक ध्रुवीकरण को मजबूत किया। ऊपरी असम, जिसे कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ माना जाता रहा है, वहां इस बार भाजपा ने सड़क, हाईवे, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को आधार बनाकर मतदाताओं का भरोसा हासिल किया। गुवाहाटी-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेसवे, डिब्रूगढ़ को दूसरी प्रशासनिक राजधानी के रूप में विकसित करने की योजना और बुनियादी ढांचे में सुधार ने मतदाताओं के फैसले को प्रभावित किया।

चुनाव परिणामों के रुझानों में कई बड़े मुकाबले भी देखने को मिले हैं, जहां गौरव गोगोई, अखिल गोगोई और लुरिनज्योति गोगोई जैसे प्रमुख नेता अपने-अपने क्षेत्रों में कड़ी टक्कर का सामना कर रहे हैं। कई सीटों पर भाजपा उम्मीदवार बढ़त बनाए हुए हैं, जिससे कांग्रेस की रणनीति कमजोर पड़ती दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में हिमंत बिस्वा सरमा की ‘विकास बनाम पहचान’ की राजनीति ने विपक्ष के जातीय समीकरण आधारित ‘3G’ दांव को कमजोर कर दिया। अहोम समुदाय के साथ-साथ हिंदू और स्थानीय मतदाताओं के एक बड़े हिस्से का समर्थन भाजपा की ओर झुकता नजर आया। कुल मिलाकर, असम चुनाव 2026 के रुझान संकेत दे रहे हैं कि राज्य में एक बार फिर भाजपा मजबूत स्थिति में है, जबकि कांग्रेस नेतृत्व वाला गठबंधन अपनी रणनीतिक अपेक्षाओं पर खरा उतरता नहीं दिख रहा है।