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हिंसा के बीच केंद्र का बड़ा फैसला, मणिपुर में AFSPA की अवधि बढ़ी

मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद केंद्र सरकार ने राज्य के अधिकांश हिस्से को सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम यानी AFSPA के तहत अगले छह महीनों के लिए ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया है। यह आदेश 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा और छह महीने तक लागू रहेगा, जब तक इसे पहले वापस नहीं लिया जाता।

हालांकि, पांच जिलों के 13 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों को इस आदेश से बाहर रखा गया है। इनमें इंफाल पश्चिम के लाम्फेल, सिंगजामेई, पटसोई और वांगोई, इंफाल पूर्व के पोरोमपट, हेइंगांग और इरीलबांग, थौबल का थौबल, बिष्णुपुर के बिष्णुपुर और नंबोल तथा काकचिंग का काकचिंग पुलिस स्टेशन क्षेत्र शामिल हैं।

केंद्र सरकार ने मणिपुर के अलावा नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी AFSPA की अवधि बढ़ाई है। नागालैंड के नौ जिलों में यह कानून लागू रहेगा, जबकि पांच अन्य जिलों के 21 पुलिस स्टेशनों के अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों को भी अधिसूचना में शामिल किया गया है। अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ असम सीमा से सटे नामसाई जिले के कुछ पुलिस स्टेशन क्षेत्रों में भी AFSPA जारी रहेगा।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब मणिपुर के कामजोंग जिले में हिंसा की नई घटना सामने आई। म्यांमार सीमा के पास पिलोंग गांव में चार लोगों के शव मिले, जिन पर गोली लगने के निशान थे। पुलिस के अनुसार, मामले में संदिग्ध उग्रवादियों की भूमिका की बात सामने आई है। मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि समाज में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हिंसा को बर्दाश्त नहीं किए जाने की बात कही।