कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें दिल अचानक प्रभावी तरीके से खून पंप करना बंद कर देता है। इससे दिमाग और शरीर के दूसरे जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन की सप्लाई रुकने लगती है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक, कार्डियक अरेस्ट में व्यक्ति अचानक बेहोश हो सकता है और सामान्य रूप से सांस लेना बंद कर सकता है। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट एक ही स्थिति नहीं हैं। हार्ट अटैक में आमतौर पर दिल की किसी नस में ब्लॉकेज के कारण हृदय की मांसपेशियों तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई प्रभावित होती है, जबकि कार्डियक अरेस्ट मुख्य रूप से दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि में गड़बड़ी से जुड़ा होता है। हालांकि, कुछ मामलों में हार्ट अटैक कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर कर सकता है।
कार्डियक अरेस्ट की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि यह कई बार बिना किसी स्पष्ट चेतावनी के अचानक हो सकता है। व्यक्ति सामान्य बातचीत या काम करते हुए अचानक गिर सकता है, बेहोश हो सकता है और सामान्य सांस लेना बंद कर सकता है। कुछ मामलों में सीने में दर्द, सांस फूलना, असामान्य थकान, चक्कर, बेहोशी या तेज/अनियमित धड़कन जैसे संकेत पहले दिखाई दे सकते हैं, लेकिन ऐसा हर मरीज में जरूरी नहीं है। ऐसी स्थिति में एक-एक सेकंड बेहद महत्वपूर्ण होता है।
अगर कोई व्यक्ति अचानक गिर जाए, आवाज देने या हिलाने पर प्रतिक्रिया न दे और सामान्य रूप से सांस न ले रहा हो या केवल हांफ रहा हो, तो तुरंत इमरजेंसी मेडिकल मदद बुलानी चाहिए। मदद पहुंचने तक CPR शुरू करना और उपलब्ध होने पर AED (Automated External Defibrillator) का इस्तेमाल करना जीवन बचाने में मदद कर सकता है। कार्डियक अरेस्ट में अस्पताल पहुंचने से पहले के शुरुआती मिनट बेहद अहम होते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में इंतजार करने के बजाय तुरंत मदद बुलाना, CPR शुरू करना और AED उपलब्ध होने पर उसका इस्तेमाल करना जरूरी कदम हैं।


