भारत में मार्च 2027 से ‘वन नेशन, वन टाइम’ व्यवस्था लागू होने जा रही है। केंद्र सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (इंडियन स्टैंडर्ड टाइम) रूल्स, 2026 अधिसूचित किए हैं। ये नियम राजपत्र में प्रकाशित होने के 180 दिन बाद प्रभावी होंगे। इसके बाद देश की सभी संस्थाओं के लिए कानूनी, प्रशासनिक, व्यावसायिक और डिजिटल कार्यों में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) का इस्तेमाल अनिवार्य होगा।
नए नियमों के तहत आधिकारिक दस्तावेजों, कानूनी अनुबंधों, वित्तीय लेन-देन, परिवहन और सार्वजनिक प्रशासन में IST को मानक समय के रूप में इस्तेमाल करना होगा। किसी अन्य टाइम रेफरेंस के उपयोग या प्रदर्शन की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, विदेशी टाइम जोन, वैज्ञानिक अनुसंधान, नेविगेशन और खगोलीय गतिविधियों के लिए निर्धारित परिस्थितियों में छूट दी जाएगी।
सरकार के मुताबिक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में माइक्रोसेकंड स्तर की सटीक टाइमिंग तेजी से महत्वपूर्ण हो रही है। पेमेंट सिस्टम, स्टॉक एक्सचेंज, टेलीकॉम और 5G नेटवर्क, पावर ग्रिड, डेटा सेंटर और डिजिटल नेविगेशन जैसी सेवाओं के सुचारू संचालन के लिए सटीक और सिंक्रोनाइज्ड समय जरूरी है।
नियमों के तहत CSIR-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) भारत के प्राथमिक समय पैमाने UTC(NPLI) को बनाए रखेगी। वहीं, अधिकृत टाइमिंग स्रोतों के जरिए देशभर में समय का प्रसार किया जाएगा। संस्थानों को स्पूफिंग, जैमिंग और साइबर हमलों से समय-सिंक्रोनाइजेशन सिस्टम की सुरक्षा के साथ वैकल्पिक व्यवस्था भी सुनिश्चित करनी होगी।


