दिल्ली में हालिया हिंसक प्रदर्शन के बाद पुलिस ने उपद्रव में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, जिन लोगों की पहचान दंगों या हिंसा में शामिल होने के रूप में होगी, उनके खिलाफ मौजूदा कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, ऐसे आरोपियों के पासपोर्ट रद्द कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
यह फैसला सोमवार को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान हुई हिंसा के बाद लिया गया। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने संसद क्षेत्र के आसपास लगाए गए सुरक्षा बैरिकेड्स को हटाने और आगे बढ़ने की कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस और सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, लाठीचार्ज किया और दंगा रोधी वाहनों की मदद ली। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी मामूली रूप से घायल हुए। वहीं, पार्टी का दावा है कि उसके संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया।
घटना के बाद CJP ने 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। पार्टी ने छात्र संगठनों से अपने-अपने जिलों में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने, छात्रों की मांगों को सार्वजनिक रूप से रखने और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के समर्थन में आवाज उठाने की अपील की है।
इससे पहले जंतर-मंतर पर चल रहा आंदोलन सीमित दायरे में था, जहां छात्र कथित NEET परीक्षा अनियमितताओं के विरोध और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। हालांकि सोमवार की झड़प के बाद आंदोलन ने व्यापक रूप ले लिया और बड़ी संख्या में नए लोग प्रदर्शन में शामिल होने लगे। कई प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पुलिस कार्रवाई के वीडियो देखने के बाद उन्होंने आंदोलन का समर्थन करने का फैसला किया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी पर अपने रुख से पीछे हटने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे, NEET मुद्दे पर संसद में चर्चा और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जांच की मांग दोहराई।


