Punjab

हाईकोर्ट चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर पंजाब-केंद्र आमने-सामने, CM मान ने उठाए सवाल

पंजाब और केंद्र सरकार के बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति को लेकर विवाद गहरा गया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान की अध्यक्षता में रविवार को हुई कैबिनेट बैठक में केंद्र सरकार के खिलाफ सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया गया। राज्य सरकार ने आरोप लगाया कि नियुक्ति के दौरान पंजाब की राय को उचित महत्व नहीं दिया गया।

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए तय संवैधानिक प्रक्रिया और मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर का पालन जरूरी है। उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार से सहमति लिए बिना नियुक्ति करना राज्य के अधिकारों की अनदेखी है। मान ने केंद्र पर न्यायपालिका में दखल का आरोप लगाते हुए नियुक्ति पर तत्काल रोक लगाने और राज्य की राय का सम्मान करने की मांग की। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भी कहा कि राज्य सरकार पंजाब के राज्यपाल से आग्रह करेगी कि नवनियुक्त मुख्य न्यायाधीश को पद की शपथ न दिलाई जाए।

हालांकि, भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने पंजाब सरकार के विरोध को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 217(1) के तहत राष्ट्रपति ने की है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को सिफारिश की थी और 10 अगस्त को पंजाब व हरियाणा सरकारों से राय मांगी गई थी। हरियाणा ने जवाब दे दिया, जबकि पंजाब की राय अभी प्राप्त नहीं हुई। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य की राय जरूरी है, लेकिन बाध्यकारी नहीं। इस बीच पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी नियुक्ति का विरोध करने पर पंजाब सरकार की आलोचना की और न्यायपालिका की स्वतंत्रता तथा हाईकोर्ट की गरिमा बनाए रखने की अपील की।