पंजाब मंत्रिमंडल की बैठक में शिक्षा, उद्योग और प्रशासन से जुड़े कई अहम निर्णय लिए गए, जिनका उद्देश्य आम जनता, खासकर छात्रों और अभिभावकों को राहत देना बताया गया है। बैठक के बाद वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा और शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इन फैसलों की जानकारी दी। सरकार ने सबसे महत्वपूर्ण निर्णय निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों की फीस वृद्धि को लेकर लिया है। अब राज्य में कोई भी निजी स्कूल सालाना 5 प्रतिशत से अधिक फीस नहीं बढ़ा सकेगा। सरकार का कहना है कि बीते वर्षों में कई संस्थानों द्वारा मनमाने ढंग से फीस बढ़ाने से अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। यदि कोई संस्थान 5 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाना चाहता है तो उसे छह महीने पहले एक विशेष समिति के समक्ष आवेदन करना होगा, जो सभी तथ्यों की जांच के बाद अनुमति देगी। बिना अनुमति फीस बढ़ाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
इसके अलावा, पिछले तीन वर्षों में 15 प्रतिशत से अधिक फीस बढ़ाने वाले स्कूलों को अतिरिक्त वसूली गई राशि लौटानी होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और बार-बार उल्लंघन की स्थिति में मान्यता रद्द करने का भी प्रावधान किया गया है। जुर्माने की राशि स्कूल के स्तर के अनुसार तय की गई है, जिसमें प्राइमरी, मिडल और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए अलग-अलग दंड व्यवस्था शामिल है। सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र को राहत देते हुए कई पुरानी नीतियों के तहत लंबित सहायता को मंजूरी देने का फैसला किया है। लगभग 99 उद्योगों को वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिससे औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। प्रशासनिक सुधार के तहत दसूहा, फगवाड़ा, मुकेरियां और गढ़दीवाला में अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) के नए पद सृजित किए जाएंगे ताकि प्रशासनिक कार्यों में तेजी आए। वहीं, केंद्र सरकार के प्रस्तावित उच्च शिक्षा कानून पर पंजाब सरकार ने आपत्ति जताते हुए इसे राज्यों के अधिकारों को प्रभावित करने वाला कदम बताया है।









