National

पिनाका बनेगा भारतीय सेना की रॉकेट आर्टिलरी की नई रीढ़, Grad सिस्टम की जगह लेगा स्वदेशी MBRL

भारतीय सेना अपनी आर्टिलरी क्षमता को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव कर रही है। इसके तहत पुराने रूसी मूल के BM-21 Grad मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से सेवा से बाहर किया जाएगा और उसकी जगह स्वदेशी ‘पिनाका’ रॉकेट सिस्टम को पूरी तरह अपनाया जाएगा।

सेना की योजना के अनुसार कुल 22 पिनाका रेजिमेंट तैयार की जानी हैं, जिनमें से लगभग 10 रेजिमेंट मध्य-2026 तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो सकती हैं। यह कदम भविष्य में बनने वाली ‘इंटीग्रेटेड रॉकेट फोर्स’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है।

पिनाका सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसकी सटीक मारक क्षमता और आधुनिक तकनीक है। इसके गाइडेड रॉकेट GPS और NavIC आधारित नेविगेशन से लैस हैं, जो इसे 75 किलोमीटर तक सटीक निशाना साधने में सक्षम बनाते हैं। वहीं, इसकी फायरिंग क्षमता भी प्रभावशाली है—मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दागे जा सकते हैं। पहले DRDO द्वारा विकसित 122mm स्वदेशी रॉकेट को Grad के विकल्प के रूप में देखा जा रहा था, जिसकी रेंज लगभग 40 किलोमीटर तक थी। हालांकि, सेना ने अधिक क्षमता और उन्नत तकनीक के कारण पिनाका पर अधिक भरोसा जताया है।

विशेषज्ञों के अनुसार आधुनिक युद्ध में अब क्षेत्रीय बमबारी की बजाय सटीक हमलों की जरूरत बढ़ गई है। ऐसे में पिनाका, दुश्मन के कमांड सेंटर और लॉजिस्टिक ठिकानों को तेजी से और प्रभावी ढंग से निशाना बनाने में सक्षम है। इसके साथ ही, यह बदलाव लॉजिस्टिक्स को भी सरल बनाएगा क्योंकि सेना को अलग-अलग कैलिबर के गोला-बारूद का प्रबंधन नहीं करना पड़ेगा। यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करता है और भविष्य के युद्ध परिदृश्यों के लिए सेना को अधिक सक्षम बनाता है।