आंध्र प्रदेश सरकार ने तिरुपति स्थित प्रसिद्ध मंदिर की धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए नए और कड़े नियम लागू करने की योजना बनाई है। सरकार का उद्देश्य मंदिर परिसर में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके तहत गैर-हिंदू श्रद्धालुओं के लिए दर्शन से पहले घोषणा पत्र देना अनिवार्य किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि यह कदम धार्मिक स्थलों की पवित्रता को संरक्षित रखने के लिए उठाया जा रहा है, जैसा कि कुछ अन्य धार्मिक संस्थानों में पहले से लागू व्यवस्था का अध्ययन कर किया जा रहा है।
राज्य सरकार ने मंदिर प्रशासन को निर्देश दिया है कि मौजूदा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। फिलहाल कई श्रद्धालु स्वेच्छा से घोषणा पत्र जमा कर रहे हैं, लेकिन कुछ मामलों में नियमों की अनदेखी की शिकायतें भी सामने आई हैं। सरकार इस व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए कानूनी प्रावधानों पर विचार कर रही है। विधानसभा में इस विषय पर चर्चा के दौरान नए कानून के मसौदे पर भी मंथन किया गया।
इसके अलावा, तिरुपति के प्रसाद से जुड़े विवाद भी राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बने हुए हैं। पिछले कुछ समय से लड्डू प्रसाद में इस्तेमाल होने वाले घी की गुणवत्ता को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद मामला और गरमा गया है, हालांकि कुछ राजनीतिक दलों ने इन आरोपों को नकारा भी है।
सरकार का कहना है कि जल्द ही विधेयक तैयार कर विधानसभा में पेश किया जाएगा। कानून पारित होने के बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा। इस फैसले को धार्मिक सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।









