देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर जारी बहस के बीच यह मुद्दा एक बार फिर Supreme Court of India पहुंच गया है। पशु अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था “Animals Are People Too” ने अदालत में नई याचिका दाखिल कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। संस्था ने अदालत से स्पष्ट करने की मांग की है कि यह आदेश आवारा कुत्तों को बिना नियमों के मारने या हटाने की अनुमति नहीं देता।
याचिका में कहा गया है कि कुछ राज्यों और स्थानीय प्रशासन ने अदालत के आदेश का गलत अर्थ निकालना शुरू कर दिया है। संस्था ने विशेष रूप से Bhagwant Mann के उस बयान का जिक्र किया है, जिसमें आवारा कुत्तों को खत्म करने की बात कही गई थी। इसके अलावा खालसा कॉलेज परिसर से कुत्तों को हटाने की घटनाओं पर भी चिंता जताई गई है।
गौरतलब है कि 19 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि रेबीज से संक्रमित, लाइलाज बीमारी से पीड़ित या बेहद खतरनाक और आक्रामक कुत्तों को तय कानूनी प्रक्रिया के तहत इच्छामृत्यु दी जा सकती है। अदालत ने बच्चों और बुजुर्गों पर बढ़ते हमलों को गंभीर चिंता का विषय बताया था।
संस्था का कहना है कि पशु जन्म नियंत्रण नियम 2023 के अनुसार इच्छामृत्यु केवल सीमित परिस्थितियों में ही संभव है और इसके लिए सख्त प्रक्रिया अपनाना जरूरी है। याचिका में यह भी कहा गया है कि “आक्रामक कुत्ते” की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने से सामान्य आवारा कुत्तों को भी मनमाने तरीके से खतरनाक घोषित किया जा सकता है।
संस्था ने मांग की है कि किसी भी कुत्ते को आक्रामक घोषित करने से पहले विशेषज्ञ समिति की जांच अनिवार्य हो। साथ ही देशभर की पुलिस को निर्देश दिए जाएं ताकि अदालत के आदेश के नाम पर कुत्तों को नुकसान पहुंचाने या जहर देने जैसी घटनाएं रोकी जा सकें।









