राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता, लेकिन अकोला जिले से आई खबर ने इस कथन को नया आयाम दे दिया है। अकोला की अकोट नगर परिषद में बीजेपी और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने हाथ मिला लिया, जो परंपरागत तौर पर विरोधी विचारधारा वाली पार्टियां हैं। 35 सीटों वाली नगर परिषद में 33 सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, लेकिन बहुमत नहीं मिला।
इस स्थिति को देखते हुए भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ नाम से एक महा-गठबंधन बनाया, जिसमें कई विरोधी दल शामिल हुए। इस गठबंधन में BJP (11 सीट), AIMIM (5 सीट), प्रहार जनशक्ति (3), शिवसेना उद्धव गुट (2), शिवसेना शिंदे गुट (1), NCP अजीत पवार गुट (2) और NCP शरद पवार गुट (1) शामिल हैं। बहुमत के लिए 25 सीटें जरूरी थीं और इस मंच ने इसे पूरा कर लिया।
हैरानी की मुख्य वजह यह है कि जहां भाजपा हिंदुत्व और AIMIM मुस्लिम हितों की राजनीति करती है, वहीं अकोट में दोनों दल ‘विकास’ के नाम पर साथ काम कर रहे हैं। यह गठबंधन राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर रहा है और दिखा रहा है कि सत्ता कभी-कभी विचारधारा से भी ऊपर हो सकती है।









