उज्जैन के महाकाल मंदिर में वीआईपी लोगों को विशेष दर्जा देकर गर्भगृह (मुख्य पूजा स्थल) में प्रवेश देने का मामला अब हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ तक पहुंच गया है. इंदौर निवासी दर्पण अवस्थी ने इस मुद्दे पर जनहित याचिका दायर की है. उनका कहना है कि आम श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, जबकि नेताओं के बेटे, व्यापारी और अधिकारियों के रिश्तेदारों को वीआईपी बताकर सीधे गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है.
“क्या हमारी आस्था कम है?” — याचिकाकर्ता का सवाल
याचिकाकर्ता का कहना है कि हर किसी की महाकाल में आस्था है, फिर सिर्फ कुछ खास लोगों को ही ये विशेष सुविधा क्यों मिलती है?
मंदिर में सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए.
“VIP के नाम पर मनमानी हो रही है” — वकील का आरोप
दर्पण अवस्थी के वकील चर्चित शास्त्री ने कोर्ट में बताया कि मंदिर में VIP के नाम पर मनमानी हो रही है:
आम लोगों को रोका जा रहा है, लेकिन कुछ खास लोगों को गर्भगृह में दर्शन करवाए जाते हैं.
हाल ही में सराफा व्यापारी संघ अध्यक्ष और एक राजनेता के बेटे को गर्भगृह में दर्शन कराए गए.
एक नेता के बेटे के लिए तो मंदिर का लाइव प्रसारण भी रोक दिया गया.
कोर्ट के सवाल और जवाब
कोर्ट ने पूछा कि इन लोगों को किस आधार पर अनुमति मिली?
वकील ने बताया कि RTI के ज़रिए जानकारी मांगी गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.
कोर्ट ने कहा, शायद कलेक्टर के पास अनुमति देने का अधिकार है.
वकील ने जवाब दिया कि नियमों के अनुसार, सिर्फ राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री जैसे बड़े VIP को अनुमति मिल सकती है.
फिर व्यापारी, नेता के बेटे या अफसरों के परिजन को कैसे अनुमति मिल गई?
कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
इस मामले में सुनवाई के बाद जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने फैसला फिलहाल आरक्षित (सुरक्षित) रख लिया है. यानि कोर्ट जल्द ही इस पर निर्णय सुनाएगा.









