भारत अपनी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में देश ने एक अत्याधुनिक स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम विकसित किया है, जिसे जल्द ही संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। इस नई तकनीक का उद्देश्य ड्रोन के माध्यम से होने वाली घुसपैठ, हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी तथा अन्य अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सरकार समानांतर रूप से स्मार्ट बॉर्डर ग्रिड परियोजना पर भी काम कर रही है। यह परियोजना आधुनिक डिजिटल तकनीकों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्मार्ट सेंसर और निगरानी उपकरणों के माध्यम से सीमा सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगी। नए एंटी-ड्रोन सिस्टम में उन्नत रडार, हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और एकीकृत निगरानी नेटवर्क शामिल होंगे, जो संदिग्ध गतिविधियों का तुरंत पता लगाकर संभावित खतरों को निष्क्रिय करने में सक्षम होंगे।
पिछले कुछ वर्षों में विशेष रूप से पंजाब और जम्मू-कश्मीर क्षेत्रों में ड्रोन गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। कई मामलों में ड्रोन के जरिए हथियार, विस्फोटक और मादक पदार्थ भारतीय सीमा में पहुंचाने की कोशिशें की गईं, जिन्हें सुरक्षा बलों ने विफल कर दिया। इसी चुनौती से निपटने के लिए यह नई व्यवस्था तैयार की गई है।
प्रारंभिक चरण में स्मार्ट बॉर्डर ग्रिड को पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगती संवेदनशील सीमाओं पर लागू किए जाने की संभावना है। सरकार की योजना बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र विकसित करने की है, जिसमें सीमा सुरक्षा बल, आधुनिक तकनीकी उपकरण, स्थानीय पुलिस, प्रशासन और सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होगी। यह पहल भविष्य की तकनीकी और हाइब्रिड युद्ध चुनौतियों से निपटने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।


