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SIR के विरोध में ठाकरे बंधुओं का बड़ा मार्च, चुनाव आयोग पर लगाए गंभीर आरोप

राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट में किए जा रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (SIR) के विरोध में 4 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त मार्च निकालने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं की पार्टियां महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) इस मार्च में अन्य राजनीतिक दलों को भी शामिल होने का न्योता देंगी। साथ ही, महाराष्ट्र के लोगों से भी मार्च में भाग लेने की अपील की जाएगी। हालांकि, मार्च का स्थान और समय बाद में घोषित किया जाएगा।

संयुक्त बयान में ठाकरे बंधुओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व वाले चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाताओं के साथ अन्याय किया गया और इसका इस्तेमाल वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के लिए किया जा रहा है। दोनों नेताओं ने इसे लोकतंत्र और संविधान से जुड़ा मुद्दा बताते हुए लोगों से एकजुट होने की अपील की। यह घोषणा चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी खबरों के बीच हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान कई मौकों पर आयोग के फैसलों पर आपत्ति दर्ज कराई। इन मुद्दों में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और दोबारा जोड़ने तथा वोटर डेटा के प्रबंधन जैसे विषय शामिल बताए गए हैं।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों में किए गए दावों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR समेत सभी अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। फॉर्म-6 विवाद पर भी आयोग ने कहा कि कानूनी फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि SIR के तहत अतिरिक्त घोषणा की व्यवस्था की गई थी। इससे पहले 23 सितंबर को उद्धव ठाकरे ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने हालिया चुनावों को लेकर भी सवाल उठाते हुए बैलेट पेपर से दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी।