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मिडिल ईस्ट तनाव का असर: शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को घरेलू बाजार भारी दबाव में खुला और शुरुआती कारोबार के दौरान प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की चिंता बढ़ने और वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण बिकवाली का माहौल देखने को मिला। बाजार खुलते ही बीएसई सेंसेक्स 800 अंकों से अधिक लुढ़क गया, जबकि एनएसई का निफ्टी 50 भी 250 अंकों से ज्यादा टूटकर कारोबार करता नजर आया। विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।

रिपोर्टों के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगी समूहों द्वारा इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए, जिसके बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की। इस घटनाक्रम से क्षेत्र में व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। तनाव बढ़ने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया, जिसका सीधा असर शेयर बाजारों पर पड़ा। भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई शेयर बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली। जापान, हांगकांग और चीन के प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करते रहे। वैश्विक निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से दूरी बनानी शुरू कर दी, जिससे बाजारों पर दबाव और बढ़ गया।

निफ्टी 50 के अधिकांश शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। आईटी, मेटल और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव रहा। विप्रो, टाटा स्टील, हिंडाल्को, महिंद्रा एंड महिंद्रा तथा टीसीएस जैसे बड़े शेयरों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर, फार्मा और हेल्थकेयर क्षेत्र के कुछ शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। सन फार्मा, डॉ. रेड्डीज और अपोलो हॉस्पिटल्स के शेयरों में मजबूती देखने को मिली। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में तनाव बना रहता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर रहती हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।