हरियाणा में एक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) की शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठे विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने इस मामले को गंभीर मानते हुए गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को संबंधित अधिकारी के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच कराने की सिफारिश की है। आयोग ने सुझाव दिया है कि यह जांच सीआईडी, विजिलेंस ब्यूरो या राज्य पुलिस की किसी अन्य सक्षम एजेंसी से कराई जाए।
यह मामला हिसार निवासी उमेद सिंह द्वारा दायर सूचना के अधिकार (आरटीआई) आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने संबंधित डीएसपी की पदोन्नति फाइल, बैंक खाते का विवरण, अवकाश रिकॉर्ड, आयकर रिटर्न, अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़े दस्तावेज और दसवीं से स्नातक तक के शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की प्रतियां मांगी थीं। हालांकि, विभाग के लोक सूचना अधिकारी ने इन सूचनाओं को आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(जे) के तहत व्यक्तिगत जानकारी बताते हुए उपलब्ध कराने से इनकार कर दिया।
द्वितीय अपील पर सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सुरा ने कहा कि सेवा रिकॉर्ड, बैंक खाते, आयकर विवरण, पदोन्नति फाइल और अनुशासनात्मक रिकॉर्ड जैसी जानकारियां निजी प्रकृति की हैं, इसलिए उनका खुलासा नहीं किया जा सकता। आयोग ने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के गिरीश रामचंद्र देशपांडे बनाम केंद्रीय सूचना आयोग के फैसले का भी उल्लेख किया।
हालांकि, आयोग ने यह भी माना कि अपीलकर्ता ने केवल प्रमाणपत्रों की प्रतियां ही नहीं मांगीं, बल्कि उनकी प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाए हैं। चूंकि संबंधित अधिकारी एक वरिष्ठ पुलिस पद पर कार्यरत हैं, इसलिए उनकी शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठे संदेह की निष्पक्ष जांच जनहित में आवश्यक है। आयोग ने निर्देश दिया कि जांच निर्धारित समय सीमा में पूरी की जाए और उसकी रिपोर्ट कानून के अनुसार अपीलकर्ता के साथ-साथ आयोग को भी उपलब्ध कराई जाए।


