जातिसूचक टिप्पणी से जुड़े विवाद के मामले में केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू बुधवार को पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के समक्ष पेश हुए। सुनवाई के दौरान उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से अपना पक्ष रखा और स्वीकार किया कि उस समय दिए गए कुछ शब्द अनुचित थे। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहले ही सार्वजनिक रूप से इस मामले में माफी मांग चुके हैं।
आयोग के अध्यक्ष जसवीर सिंह गढ़ी ने सुनवाई के दौरान बिट्टू को सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए कुछ धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर जाकर सम्मान प्रकट करने की सलाह दी। इनमें श्री हरमंदिर साहिब अमृतसर, डेरा बल्लां जालंधर, राम तीर्थ स्थल और डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मारक शामिल हैं। अध्यक्ष ने कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और संबंधित वर्ग की भावनाओं को संतोष मिल सकता है।
सुनवाई में बिट्टू ने घटना के समय की परिस्थितियों को तनावपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने विवाद से जुड़ा वीडियो पहले ही सोशल मीडिया से हटा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दिन पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ असहज स्थिति बनी, जिससे वे मानसिक रूप से प्रभावित हुए।
उन्होंने आयोग को बताया कि घटनाओं के क्रम और लगातार तनाव के कारण वह भावुक हो गए थे और इसी दौरान विवादित शब्द निकल गए। बिट्टू ने दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी भी वर्ग की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था और वे सभी समुदायों के सम्मान में विश्वास रखते हैं।
यह मामला 26 मई को हुए निकाय चुनाव मतदान के दौरान शुरू हुआ था, जब धूरी में भाजपा नेता ओंकार सिंह की हिरासत के बाद पुलिस और बिट्टू के बीच बहस का वीडियो सामने आया था। इसके बाद आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए उन्हें तलब किया था। अब आयोग आगे इस मामले की समीक्षा करेगा।









