अमेरिका के सैन्य और न्यायिक इतिहास से जुड़ा एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर 2009 में हुए गोलीबारी हमले के दोषी पूर्व आर्मी मेजर निदाल मलिक हसन को फायरिंग स्क्वाड के जरिए मौत की सजा देने और इसका लाइव प्रसारण करने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस दावे की आधिकारिक पुष्टि के बिना इसे सच मानना उचित नहीं होगा।
2009 के हमले में गई थी 13 लोगों की जान
यह घटना 5 नवंबर 2009 की है, जब फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर तैनात सेना के मनोचिकित्सक निदाल हसन ने गोलीबारी की थी। इस हमले में 13 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 12 अमेरिकी सैनिक शामिल थे। इसके अलावा 32 लोग घायल हुए थे। इस घटना ने अमेरिका की सैन्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।
सार्वजनिक फांसी का पुराना इतिहास
अमेरिका में सार्वजनिक रूप से मौत की सजा देने का अंतिम मामला 1936 में केंटकी के ओवेन्सबोरो शहर में सामने आया था। यहां रेनी बेथिया को फांसी दी गई थी। इसके बाद मृत्युदंड की प्रक्रिया आम जनता से दूर, निर्धारित कानूनी नियमों के तहत संपन्न की जाने लगी।
फायरिंग स्क्वाड की प्रक्रिया क्या है?
फायरिंग स्क्वाड के जरिए मृत्युदंड देने में प्रशिक्षित निशानेबाजों की एक टीम शामिल होती है। अमेरिका में इस तरीके का इस्तेमाल बेहद सीमित मामलों में हुआ है। कुछ मामलों में निशानेबाजों की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक हथियार में डमी कारतूस रखने की व्यवस्था भी अपनाई जाती है।
सार्वजनिक रूप से मृत्युदंड देने और उसका प्रसारण करने का विचार मानवाधिकारों तथा न्यायिक पारदर्शिता को लेकर गंभीर बहस पैदा कर सकता है। लेकिन निदाल हसन को 3 दिसंबर को लाइव मौत की सजा दिए जाने संबंधी दावे की पुष्टि के लिए विश्वसनीय आधिकारिक जानकारी जरूरी है।


