ईरान इस समय एक अभूतपूर्व डिजिटल संकट का सामना कर रहा है। फरवरी के अंत में शुरू हुआ देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट अब 57 दिनों से जारी है, जिसे अब तक का सबसे लंबा राष्ट्रीय इंटरनेट शटडाउन माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय निगरानी संस्था NetBlocks के मुताबिक, इतने लंबे समय तक पूरे देश में इंटरनेट बंद रहना एक नया रिकॉर्ड है। इससे पहले सूडान में 2021 के दौरान करीब 35-36 दिनों तक इंटरनेट बंद रहा था। इस ब्लैकआउट का असर बेहद व्यापक है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की 9 करोड़ से ज्यादा आबादी बाहरी डिजिटल दुनिया से लगभग कट चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका असर न सिर्फ आम जनजीवन पर, बल्कि व्यापार, अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर भी गंभीर रूप से पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि यह इंटरनेट प्रतिबंध उस समय लागू किया गया, जब अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव बढ़ गया था और देश में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। इससे पहले 2019 में भी ईरान ने करीब 7 दिनों तक इंटरनेट बंद किया था, लेकिन इस बार की स्थिति कहीं ज्यादा गंभीर और लंबी है। इस दौरान ईरानी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए देश में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की है। डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को भी खारिज किया गया है, जिसमें उन्होंने ईरान के भीतर विभाजन की बात कही थी। वहीं, कूटनीतिक स्तर पर गतिरोध बना हुआ है। Al Jazeera की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत फिलहाल ठप है और तेहरान अमेरिकी मांगों को “अतिवादी” बता रहा है।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची लगातार क्षेत्रीय दौरे और बातचीत में जुटे हैं, जबकि पाकिस्तान भी मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरानी नेतृत्व से बातचीत कर शांति प्रयासों को आगे बढ़ाने की बात कही है। फिलहाल इंटरनेट बहाली को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक कूटनीतिक गतिरोध खत्म नहीं होता, तब तक इस डिजिटल प्रतिबंध के हटने की संभावना कम बनी हुई है।









