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JSSC CGL कथित फर्जीवाड़े की जांच तेज, अभय तिवारी समेत तीन आरोपी रिमांड पर

झारखंड में JSSC CGL परीक्षा में कथित फर्जीवाड़े की जांच के बीच CID ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले के मुख्य संदिग्ध अभय कुमार तिवारी उर्फ मनोज कुमार तिवारी, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी और भाई अक्षय कुमार तिवारी को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया है। CID मुख्यालय में अभय तिवारी से अगले तीन दिनों तक पूछताछ की जाएगी। इस मामले में अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अभय तिवारी JPSC की परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर कार्यरत रहा है। CID ने उसे 22 जुलाई को गोड्डा जिले के पौड़ैयाहाट से गिरफ्तार किया था। उस समय उसकी गिरफ्तारी JPSC मेधा घोटाले की जांच के सिलसिले में हुई थी। बाद में JSSC CGL परीक्षा में कथित पेपर लीक मामले में उसकी पत्नी और भाई को भी 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया।

जांच के लिए गठित SIT ने तीनों से पूछताछ शुरू कर दी है। CID के मुताबिक, मामले से जुड़े 18 अन्य संदिग्धों को भी नोटिस देकर पूछताछ की गई है। अब तक SIT 37 से अधिक संदिग्धों और आरोपियों के बयान दर्ज कर चुकी है। पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का नेटवर्क कैसे संचालित किया जा रहा था। साथ ही यह भी पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और अभ्यर्थियों तक परीक्षा से जुड़ी जानकारी या कथित प्रश्नपत्र किस माध्यम से पहुंचाए गए। इधर, JPSC की 14वीं प्रतियोगिता परीक्षा में अनुचित तरीके से सफल हुए तीन अभ्यर्थियों को भी CID ने पांच दिन की रिमांड पूरी होने के बाद शनिवार को जेल भेज दिया। इनमें उमाकांत उरांव, मनोज कुमार और रोशन केरकेट्टा शामिल हैं।