त्योहारी सीजन से पहले देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते स्टॉक को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की मोदी सरकार पर चीनी की उपलब्धता और एथेनॉल नीति को लेकर सवाल उठाए थे। अब बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए आंकड़ों के साथ जवाब दिया है।
खरगे ने दावा किया था कि पिछले तीन महीनों में चीनी की कीमतों में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और देश में चीनी का स्टॉक नौ वर्षों के निचले स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब घरेलू बाजार में चीनी की कमी है और सरकार को 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करनी पड़ रही है, तो गन्ने और अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन के लिए क्यों किया जा रहा है। उन्होंने एथेनॉल नीति की समीक्षा की मांग भी की।
अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब देते हुए कहा कि चीनी के आयात का फैसला एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम (E20) के आधार पर नहीं, बल्कि देश में चीनी के उत्पादन, खपत और उपलब्ध स्टॉक के संतुलन को ध्यान में रखकर किया जाता है। उन्होंने बताया कि 2025-26 में चीनी उत्पादन का शुरुआती अनुमान करीब 349 लाख टन था, जो अब घटकर लगभग 280 लाख टन रहने का अनुमान है। उत्पादन में आई इस गिरावट के चलते स्टॉक पर दबाव बढ़ा है।
मालवीय ने कांग्रेस के एथेनॉल संबंधी आरोपों को खारिज करते हुए यूपीए सरकार के आंकड़ों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 2009-10 से 2013-14 के बीच यूपीए-2 के कार्यकाल में 75.25 लाख मीट्रिक टन चीनी का आयात हुआ था। अकेले 2009-10 में 41.8 लाख मीट्रिक टन चीनी आयात की गई थी, जब E20 नीति अस्तित्व में नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि आयातित कच्ची चीनी का कुछ हिस्सा प्रोसेसिंग के बाद दोबारा निर्यात किया जाता है।


