भारतीय सेना बदलते युद्ध के खतरे और ड्रोन आधारित हमलों को देखते हुए अपने एयर डिफेंस सिस्टम को बड़े स्तर पर आधुनिक बनाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत दशकों पुरानी Bofors L-70 Air Defence Gun और ZU-23-2 जैसी प्रणालियों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और उनकी जगह नई पीढ़ी की Air Defence Gun System (ADGS) तैनात की जाएगी। सेना करीब 2,000 पुरानी गनों को बदलने की योजना पर काम कर रही है, जबकि फिलहाल 220 आधुनिक टोएड एयर डिफेंस गन सिस्टम की मांग रखी गई है। इनका उद्देश्य कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन, मिसाइल और लोइटरिंग म्यूनिशन जैसे खतरों से प्रभावी सुरक्षा देना है।
हाल के युद्धों में ड्रोन और स्वार्म अटैक्स की बढ़ती भूमिका ने यह साबित कर दिया है कि महंगे मिसाइल सिस्टम की तुलना में सस्ते लेकिन तेज हमलों का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। ऐसे में नई ADGS प्रणाली कम लागत में बेहतर रक्षा क्षमता प्रदान करेगी। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत इसका स्मार्ट गोला-बारूद होगा, जिसमें प्रोग्रामेबल फ्यूज और एयरबर्स्ट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। यह तकनीक लक्ष्य के पास हवा में विस्फोट कर दुश्मन ड्रोन या मिसाइल को नष्ट करने में सक्षम होगी।
नई प्रणाली को मल्टी-लेयर एयर डिफेंस नेटवर्क का अंतिम सुरक्षा कवच माना जा रहा है, जो S-400 और आकाश मिसाइल सिस्टम के बाद आखिरी रक्षा पंक्ति के रूप में काम करेगी। इस परियोजना के ट्रायल 2026 में प्रस्तावित हैं और 2030 के बाद बड़े पैमाने पर इसे सेना में शामिल किए जाने की संभावना है। इस अपग्रेड में भारतीय रक्षा कंपनियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहने की उम्मीद है।









