मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट का उपचुनाव इस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह भाजपा का टिकट चयन है। पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता नरोत्तम मिश्रा को इस सीट से प्रबल दावेदार माना जा रहा था, लेकिन पार्टी ने अंतिम समय में आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाकर सभी को चौंका दिया।
टिकट की घोषणा के बाद दतिया में भाजपा कार्यकर्ताओं और नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों ने खुलकर नाराजगी जताई। विरोध इतना बढ़ा कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर करीब 11 घंटे तक जाम लगा रहा, जिसका असर आसपास के कई जिलों में भी देखने को मिला। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई और पार्टी के कुछ स्थानीय नेताओं ने विरोधस्वरूप अपने इस्तीफे भी सौंप दिए। हालांकि, भाजपा नेतृत्व ने साफ कर दिया कि इन इस्तीफों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती दिखाई दी और नरोत्तम मिश्रा ने भी पार्टी के फैसले को स्वीकार करने के संकेत दिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का यह फैसला हाल के चुनावी प्रदर्शन को ध्यान में रखकर लिया गया है। वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा अपनी पारंपरिक सीट से कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती के हाथों हार गए थे। इससे पहले 2018 के चुनाव में भी उन्हें बेहद कम अंतर से जीत मिली थी। लगातार घटते चुनावी प्रदर्शन ने पार्टी नेतृत्व को नए विकल्प पर विचार करने के लिए प्रेरित किया।
भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारकर न केवल नए नेतृत्व को मौका दिया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को भी साधने की कोशिश की है। माना जा रहा है कि पार्टी भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए दतिया में नए चेहरे के जरिए संगठन को मजबूत करने और चुनावी बढ़त हासिल करने की तैयारी कर रही है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा का यह नया दांव उपचुनाव में कितना सफल साबित होता है।


