Madhya Pradesh

मध्य प्रदेश में UCC का नया ड्राफ्ट: लिव-इन में रहेंगे तो रजिस्ट्रेशन जरूरी, अलग होने के भी होंगे नियम

मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार का मसौदा लगभग तैयार है और इसे आगामी मानसून सत्र में विधानसभा में पेश किया जा सकता है। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक अब लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं, यदि रजिस्टर्ड लिव-इन पार्टनर अलग होना चाहते हैं, तो उन्हें भी विवाह विच्छेद जैसी तय कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। यदि कोई व्यक्ति किसी दूसरे से शादी करना चाहता है, तो पहले उसे अपने पुराने लिव-इन रजिस्ट्रेशन को निरस्त कराना होगा। हालांकि, एक पक्ष अकेले भी रजिस्ट्रेशन निरस्त करने का आवेदन दे सकेगा, लेकिन दूसरा पक्ष चाहे तो इस फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है।

सरकार ने इस मसौदे को पहले की तुलना में अधिक सरल बनाया है। उत्तराधिकार से जुड़े प्रावधानों को 100 से घटाकर सिर्फ 30 कर दिया गया है, जिससे मध्य प्रदेश का UCC, उत्तराखंड और गुजरात के कानूनों की तुलना में अधिक संक्षिप्त होगा। प्रस्तावित कानून में आदिवासी और घुमंतू-अर्द्धघुमंतू समुदायों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। वहीं, यदि पहले से शादीशुदा व्यक्ति किसी अन्य के साथ लिव-इन में रहता है, तो उस पर लागू मौजूदा आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी। फिलहाल यह मसौदा अंतिम चरण में है और कानून बनने से पहले इस पर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है।