केंद्र सरकार, असम सरकार और नागालैंड सरकार के बीच असम-नागालैंड सीमा क्षेत्र में खनिज तेल और गैस संचालन को सुगम बनाने के लिए एक ऐतिहासिक त्रिपक्षीय समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा और नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो मौजूद रहे। अमित शाह ने इसे पूर्वोत्तर भारत के विकास और ऊर्जा क्षेत्र में नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
गृह मंत्री ने कहा कि नागालैंड में तेल, गैस और खनिज संसाधनों के विशाल भंडार मौजूद हैं, जिनका दोहन भारत की विदेशी तेल और गैस पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान उत्पादन क्षमता को 10 गुना से अधिक बढ़ाने की संभावना है। साथ ही नागालैंड सरकार ने पूरे राज्य में तेल अन्वेषण की अनुमति देने पर सहमति जताई है, जिससे निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। अमित शाह ने इस समझौते को सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि दोनों राज्यों ने राष्ट्रीय संपदा के बेहतर उपयोग और क्षेत्रीय विकास के लिए सहयोग का मार्ग चुना है। इससे न केवल आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राज्यों के बीच विश्वास और सौहार्द भी मजबूत होगा।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वर्ष 2019 के बाद हुए 12 शांति समझौतों के कारण क्षेत्र में हिंसा में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है। इसके परिणामस्वरूप पूर्वोत्तर आज पर्यटन, निवेश और उद्योग का उभरता हुआ केंद्र बन रहा है। शाह ने यह भी बताया कि क्षेत्र के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से से AFSPA हटाया जा चुका है और आने वाले समय में अधिकांश पूर्वोत्तर राज्यों को इससे मुक्त करने का लक्ष्य है। गृह मंत्री ने विश्वास जताया कि यह समझौता भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा, आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति देगा और पूर्वोत्तर क्षेत्र के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही, तेल और गैस क्षेत्र में निवेश बढ़ने से रोजगार, बुनियादी ढांचे और क्षेत्रीय समृद्धि के नए अवसर पैदा होंगे।









