केंद्र सरकार ने प्रश्नपत्र लीक और परीक्षाओं में अनुचित साधनों के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए कानून को और सख्त बनाने की दिशा में कदम उठाया है। सरकार ने सोमवार को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक सदन में रखा।
प्रस्तावित संशोधन में संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर कम से कम सात साल की सजा और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, अन्य गंभीर मामलों में अधिकतम 10 साल तक के कारावास और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
विधेयक के तहत परीक्षा से जुड़े अपराधों की जांच को समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार, सभी जांच प्रक्रियाएं दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी। इसके अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का प्रावधान भी शामिल है। इन अदालतों को आरोपपत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करनी होगी।
यह कदम हाल के वर्षों में सामने आए प्रश्नपत्र लीक मामलों और परीक्षा व्यवस्था पर उठे सवालों के बाद उठाया गया है। सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने की भी घोषणा की है, जिसका उद्देश्य पारदर्शी और भरोसेमंद परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है।


