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AI और ड्रोन तकनीक से बदल रही जंग की तस्वीर, IAF प्रमुख ने आत्मनिर्भरता पर दिया जोर

भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि बदलते युद्ध के दौर में वायुसेना को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नई तकनीकों से लैस करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना को अपनी तकनीकी और परिचालन क्षमता लगातार मजबूत करनी होगी। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने वायुसेना की ताकत बढ़ाने में आत्मनिर्भरता को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्वदेशी रक्षा प्रणालियों और सैन्य प्लेटफॉर्म की भूमिका पर जोर देते हुए तेजस लड़ाकू विमान, प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर और अस्त्र मिसाइल जैसी क्षमताओं का उल्लेख किया। उनका कहना है कि आधुनिक हथियार प्रणालियों के साथ घरेलू स्तर पर विकसित रक्षा तकनीक को मजबूत करना देश की सैन्य क्षमता के लिए अहम है।

उन्होंने नए एयरक्राफ्ट की डिलीवरी में होने वाली देरी पर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, विमानों की समय पर आपूर्ति नहीं होने से वायुसेना की परिचालन क्षमता प्रभावित होती है। हालांकि, नए एयरक्राफ्ट की खरीद से मौजूदा क्षमता में आई कमी को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। ड्रोन फोर्स को लेकर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि फिलहाल अलग ड्रोन फोर्स बनाने की योजना नहीं है। वायुसेना ड्रोन और लॉइटरिंग म्यूनिशन की संख्या लगातार बढ़ा रही है, लेकिन इन्हें अलग इकाई के बजाय मौजूदा सैन्य ढांचे में शामिल करने पर जोर है। उन्होंने कहा कि ड्रोन, मिसाइल और अन्य हथियार प्रणालियों को एकीकृत तरीके से इस्तेमाल करने से युद्ध के मैदान में अधिक प्रभावी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।