अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी संघर्ष फिलहाल सीजफायर के तहत ठहराव पर है. दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल तुर्की की राजधानी इस्तांबुल में शांति वार्ता के लिए एकत्रित हैं. हाल ही में दोनों देशों के बीच दो दौर की बातचीत भी हो चुकी है, लेकिन पाकिस्तान के रुख ने चिंताएं बढ़ा दी हैं.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने चेतावनी दी है कि यदि इस्लामाबाद और काबुल के बीच चल रही बातचीत में तालिबान अपने वादे पूरी तरह से नहीं निभाता, तो पाकिस्तान अफगानिस्तान के साथ “खुली जंग” करने के विकल्प पर विचार कर सकता है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान हमेशा शांति चाहता है, लेकिन पिछले दशकों में अफगान शरणार्थियों की वजह से पाकिस्तान को सुरक्षा खतरे झेलने पड़े हैं.
तुर्की में बातचीत में पाकिस्तान की तरफ़ से 2 सदस्यीय सुरक्षा टीम और अफगान तालिबान की तरफ़ से 6 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं. प्रतिनिधिमंडल में गृह, रक्षा और विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद हैं. तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि वार्ता दोहा समझौते के बाद जारी है और अन्य विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा चल रही है.
वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का कहना है कि बातचीत के नतीजे रविवार तक स्पष्ट हो जाएंगे. इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें इस वार्ता पर टिकी हैं कि क्या दोनों देशों के बीच स्थायी शांति स्थापित हो पाएगी या संघर्ष फिर उभरकर सामने आएगा.









