देश में समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर सियासी बहस एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा और राजग शासित राज्यों में इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं, वहीं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने प्रदेश में यूसीसी लागू करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से कहा है कि अगर यूसीसी लागू करना है तो संसद में विधेयक पेश कर उस पर व्यापक चर्चा कराई जानी चाहिए।
यूसीसी लागू करने की दिशा में उत्तराखंड सबसे आगे रहा है। राज्य में 27 जनवरी 2025 से यह कानून प्रभावी हो चुका है। इसके बाद गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी यूसीसी से संबंधित विधेयक विधानसभा से पारित किए गए हैं। गुजरात के विधेयक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल चुकी है और अब राज्य सरकार नियमों को लागू करने की तैयारी में है। असम और मध्य प्रदेश में भी विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की प्रशासनिक और संवैधानिक औपचारिकताएं जारी हैं।
भाजपा शासित अन्य राज्यों में भी यूसीसी को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। महाराष्ट्र में पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठित की गई है। वहीं पश्चिम बंगाल में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने अगले छह महीनों में यूसीसी लागू करने की बात कही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-राजग शासित सभी 21 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यूसीसी लागू करने का लक्ष्य बताया है। ऐसे में उमर अब्दुल्ला का विरोध यूसीसी को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेद को और स्पष्ट करता है। अब इस मुद्दे पर संसद, राज्य सरकारों और अदालतों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

