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सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार पर लगाया ₹10 लाख जुर्माना, मुल्ला अफरोज की NSA हिरासत रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने 2024 की संभल हिंसा के आरोपी मुल्ला अफरोज की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने माना कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को निवारक हिरासत का आधार नहीं बनाया जा सकता।

मामला नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी। अफरोज को जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अक्टूबर 2025 में उसके खिलाफ NSA के तहत हिरासत का आदेश जारी किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुख्य सवाल यह था कि क्या पुलिस कस्टडी में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर NSA के तहत किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जा सकता है। अदालत ने इस आधार की वैधता पर सवाल उठाए थे। अब शीर्ष अदालत ने हिरासत आदेश को रद्द करते हुए राज्य सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाई है। हालांकि, यह फैसला अफरोज के खिलाफ मूल आपराधिक मामले में दोष या निर्दोषता का निर्धारण नहीं करता।