भारतीय सेना की ताकत और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। AK-203 राइफल के लिए जरूरी 7.62×39 एमएम गोला-बारूद की सप्लाई अब भारत में ही मजबूत की जा रही है। इसके लिए अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस ने इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड यानी IRRPL के साथ पांच साल का समझौता किया है। इस डील का मकसद सिर्फ गोलियों की सप्लाई करना नहीं, बल्कि देश में एक मजबूत और भरोसेमंद घरेलू सप्लाई चेन तैयार करना है। यानी जिन AK-203 राइफलों का निर्माण भारत में हो रहा है, उनके लिए जरूरी एमुनेशन की उपलब्धता भी देश के भीतर सुनिश्चित की जाएगी।
AK-203 भारत और रूस के रक्षा सहयोग का अहम हिस्सा है। उत्तर प्रदेश के अमेठी स्थित कोरवा में IRRPL की फैक्ट्री में इन राइफलों का उत्पादन किया जा रहा है। इस संयुक्त उपक्रम में भारतीय और रूसी रक्षा कंपनियों की भागीदारी है। अब इस पूरी व्यवस्था में अडानी डिफेंस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर में कंपनी ने बड़े स्तर पर एमुनेशन और मिसाइल निर्माण की सुविधाएं विकसित की हैं। नई साझेदारी के जरिए भारतीय सेना के लिए गोला-बारूद की निरंतर उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा।
दुनिया में बढ़ते संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर दबाव के बीच यह कदम रणनीतिक तौर पर अहम माना जा रहा है। जरूरत के समय विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम करना किसी भी देश की रक्षा तैयारियों के लिए बेहद जरूरी है। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में भी बड़ा संदेश देती है। लक्ष्य साफ है-हथियार भारत में बनें, उनका एमुनेशन भी भारत में तैयार हो और सेना की जरूरतों के लिए देश किसी बाहरी सप्लाई पर मजबूर न हो। यानी AK-203 को अब सिर्फ रूसी तकनीक नहीं, भारत का अपना देसी दम भी मिलेगा।


